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अंकारा। वर्तमान कोरोना वायरस के प्रकोप के बारे में तुर्की समाज ने 2000 साल पहले ही आगाह कर दिया था। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
डेली सबा डॉट कॉम में प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि तुर्कियों ने 2000 साल पहले बनाएं अपने कैलेंडर में टिड्डी दल के आक्रमण, आग, भूकंप और महामारियों के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था। तुर्कियों के बनाए इस प्राचीन कैलेंडर को ’12 हायवानली तुर्क तकविमी’ यानी 12 जानवरों का तुर्की कैलेंडर कहा जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कैलेंडर को हज़रत ईसा से 209 साल पहले तैयार किया गया था और हर साल की किसी एक जानवर से उसकी पहचान की जाती है। इसमें कुल 12 जानवर हैं और वह हैं- चूहा, गाय, बाघ, खरगोश, मछली, सांप, घोड़ा, भेड़, बंदर, मुर्गा, कुत्ता और सूअर।

कैलेंडर की बात पर यकीन किया जाए तो साल 2020 ‘चूहा वर्ष’ है। तुर्की के इर्ज़ुरूम प्रांत के इतिहास शोधकर्ता ओजान तुर्क के शोध पर यकीन किया जाए तो यह कैलेंडर प्राचीन तुर्की की सभ्यता का परिचय देता है। महमूद काशगिरी की किताब ‘दीवान लुगतुल तुर्क’ और इब्राहिम हकी इरज़ूरमी की किताब ‘मेरी फेटनेम’ में दावा किया गया है कि कैलेंडर की भविष्यवाणियां हमें चौंकाती हैं।
साल 2020 में की गई भविष्यवाणी सच साबित हुई है जिसमें ईरान पर टिड्डी दल का हमला, ऑस्ट्रेलिया में लगी भयानक आग, इलाज़िग में खतरनाक भूकंप और वर्तमान में कोरोना वायरस महामारी का जिक्र शामिल है।
साल 2020 में जैसे ही इस साल को ‘चूहा वर्ष’ माना गया कई भविष्यवाणियां सही साबित होना शुरू हो गई। वेबसाइट कहती है कि कैलेंडर में अफ्रीका के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में खतरनाक मारकाट की आशंका बताई गई है। यह भी बतय ग़ाय है कि कई इलाके बरसात और लूट में बर्बाद हो जाएंगे। साल के दूसरे हिस्से में काफी लूट और चोरियां होंगी।
ओजान तुर्क का कहना है कि जबकि पूरी दुनिया बसंत के मौसम में है, हम अभी बारिश का सामना कर रहे हैं। टिड्डियाँ हमला कर रही हैं और अब वायरस का हमला हो गया है। उम्मीद करनी चाहिए कि आगे की भविष्यवाणियां सही साबित ना हो।
कोरोना वायरस जेसी महामारी को तुर्की ज़बान में ‘जातुलजिंब’ कहा गया है। इसका मतलब यह हुआ कि ऐसी महामारी होने पर बुखार चढ़ता है, सर्दी लगती है, खांसी आती है, धड़कन अस्थिर हो जाती है और बाद में सांस लेना बंद हो जाता है। इससे इंसान खतरनाक मौत मरता है।
कैलेंडर के मुताबिक इस बीमारी का इलाज एक पौधे ‘उदी हिंदी’ में बताया गया है इसी पौधे को ‘कुश्ती बहरी’ भी कहा जाता है। कैलेंडर में उदी हिंदी पौधे को इस बीमारी का इलाज बताया है। तुर्क शोधकर्ता ने हालांकि इस कैलेंडर को लोगों के तजुर्बे के आधार पर एक दस्तावेज तो कहा लेकिन यह मानने से इनकार किया कि यह किसी तरह की दिव्य भविष्यवाणी या भविष्यवाणी या कयामत के बारे में बताता है।
इस कैलेंडर का मकसद सिर्फ लोगों को आने वाले खतरों से आगाह करना है। तुर्क ने कहा हालांकि हमारे देश में शोध की संस्कृति घटी है और पुराने संदर्भों को नहीं पढ़ा जाता लेकिन कुछ भविष्यवाणी सही साबित होने के बाद इस तुर्की कैलेंडर में लोगों की रुचि बढ़ गई है।

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