Live Location Tracking Mobile application

Live Location Tracking Mobile application

नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी की सरकार हर नागरिक का बारीक से बारीक डाटा बनाने जा रही है। जिस तरह से सरकार को CAA-NRC-NPR पर कदम पीछे खींचने पड़े हैं, अब हर नागरिक का डाटा स्टोर करने का नया प्लेटफॉर्म बन रहा है जिसे NSR यानी ‘नेशनल सोशल रजिस्ट्री’ के नाम से जाना जाएगा। यह खुलासा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त की गई है।

मशहूर न्यूज़ वेबसाइट हफिंगटन पोस्ट पर छपी एक ख़बर के अनुसार ‘आधार’ से सरकार सीधे जानकारी प्राप्त करेगी जिसमें किसी के घर का पता बदलने से लेकर, किस आधार नम्बर वाले की किस आधार वाले से शादी हुई है और उसकी सालाना कमाई से लेकर बैंक खातों की स्थिति और ख़र्च की सूचना तक सरकार जब मर्जी हासिल करती रहेगी। पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि यह डाटाबेस इतना एडवांस होगा कि अपने आप को रियल टाइम में खुद ही अपडेट कर लेगा। अगर किसी व्यक्ति ने शहर बदला है, सफर किया है, नौकरी बदली है, नई सम्पत्ति खरीदी है, परिवार में किसी नए सदस्य का जन्म हुआ है या किसी की मृत्यु हुई है तो इसकी जानकारी सरकार को होगी। इसके डाटा के अपडेट होने की बारीकी का अंदाज़ा इसी से लगा लीजिए कि यदि किसी की बीवी या दामाद ससुराल गया है तो वह जानकारी भी सरकार के पास अपडेट रहेगी।

पोर्टल का दावा है कि नीति आयोग में 4 अक्टूबर 2019 को विशेष सचिव की हुई एक बैठक में हर एक घर की जियो टैगिंग करके इसे ‘भुवन’ नाम के सिस्टम से जोड़े जाने पर निर्णय हुआ है। इसे इसरो विकसित कर रहा है। ‘भुवन’ वेबसाइट पर उपलब्ध एक डाटाबेस है जो जियो सेपिशियल है यानी भूगोल और लोकेशन की स्थिति को रियल टाइम पर अपडेट करेगा। यह सिस्टम बनाने में पांच साल का समय लगेगा।

अब तक 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति की जनगणना (SECC) को अपडेट करने के लिए एक नियमित अभ्यास करना पड़ता है लेकिन अब प्रस्तावित राष्ट्रीय सामाजिक रजिस्ट्री यानी NSR के पीछे सरकार यह दलील दे रही है कि गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना इसका मक़सद है और सरकार का खर्च सही पात्र लोगों तक पहुँचनी चाहिए। तथ्य यह है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय SECC के लिए ज़िम्मेदार है, वही इस योजना को आगे बढाने में रुचिकर है। यह SECC अपडेट एक सहज नौकरशाही काम बनाने की योजना है।

परियोजना का विकास ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया गया था, लेकिन तीन अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित किया गया था: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण भारत को संभाला, शहरी जनगणना को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा किया गया, और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जाति की जनगणना की गई। गृह मंत्रालय द्वारा भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) और भारत के जनगणना आयुक्त को यह जिम्मेदारी दी गई थी।

दिनांक 3 जुलाई 2015 को, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार ने SECC द्वारा जमा किए गए सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों को प्रकाशित किया, लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील जाति के आंकड़ों को रोक दिया गया था।

फोटो कैप्शन- यूआईडीएआई के एक रूलिंग में कहा गया है कि आधार में डेटा को लेकर सुधार प्रक्रिया में हैं

Leave a Reply